2 करोड़ के सोने से सजेगी गवर माता! जोधपुर में निकलेगी भव्य शोभायात्रा, खास परिधान बना चर्चा का केंद्र

राजस्थान: की सांस्कृतिक राजधानी माने जाने वाले Jodhpur में इस बार गवर माता की शोभायात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। हर साल की तरह इस बार भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गवर माता का भव्य श्रृंगार किया जाएगा, लेकिन इस बार खास बात यह है कि माता को करीब 2 करोड़ रुपए के सोने के आभूषण पहनाए जाएंगे।

गणगौर पर्व के अवसर पर आयोजित होने वाली यह शोभायात्रा शहर की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। गवर माता का यह उत्सव महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है और इसे सौभाग्य, समृद्धि और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है।

27 मार्च को ससुराल जाएंगी गवर माता

मान्यता के अनुसार, Gangaur के दौरान गवर माता चैत्र शुक्ल तृतीया को अपने पीहर आती हैं और कुछ दिन यहां निवास करती हैं। इसके बाद 27 मार्च को वे पुनः अपने ससुराल के लिए रवाना होती हैं। इसी दिन उनकी भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

इस दौरान शहर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों, झांकियों और सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन किया जाता है। पूरा शहर उत्सव के रंग में रंग जाता है और हर गली-मोहल्ले में श्रद्धा और उल्लास का माहौल देखने को मिलता है।

2 करोड़ का सोना और खास श्रृंगार

इस बार गवर माता के श्रृंगार में करीब 3 किलो सोना इस्तेमाल किया जाएगा, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ रुपए बताई जा रही है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे विशेष अवसर के रूप में देखा जाता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, हर साल माता के श्रृंगार और परिधान के लिए अलग-अलग प्रतिभाओं को मौका दिया जाता है, जिससे कला और संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।

कोमल राठी ने तैयार किए विशेष परिधान

इस वर्ष गवर माता के परिधान तैयार करने का जिम्मा Komal Rathi को दिया गया है। जोधपुर के लाल सागर क्षेत्र की निवासी कोमल राठी ने इस अवसर के लिए विशेष डिजाइन और पारंपरिक शैली में परिधान तैयार किए हैं।

उनके चयन से स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। यह न केवल उनके लिए सम्मान की बात है, बल्कि क्षेत्र की प्रतिभा को मंच देने का एक अवसर भी है।

70 साल पुरानी परंपरा

गवर माता की यह शोभायात्रा पिछले करीब 70 वर्षों से लगातार आयोजित की जा रही है। माता की सवारी चांदी की बग्घी में निकाली जाती है, जो इस आयोजन की सबसे आकर्षक झलकियों में से एक होती है।

यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए घंटाघर तक पहुंचती है और फिर वापस अपने निर्धारित स्थान पर लौटती है। इस दौरान रास्ते में श्रद्धालु माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि जोधपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाता है। इसमें पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत, नृत्य और झांकियां शामिल होती हैं, जो राजस्थान की संस्कृति को जीवंत बनाती हैं।

स्थानीय प्रशासन और आयोजक समिति द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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