अलवर में खाद के साथ नैनो यूरिया-डीएपी खरीद अनिवार्य, किसानों में नाराजगी

अलवर जिले में खरीफ सीजन के दौरान किसानों को खाद प्राप्त करने के लिए एक नई शर्त का सामना करना पड़ रहा है। कई सहकारी समितियों पर यूरिया और डीएपी खाद के साथ नैनो यूरिया और नैनो डीएपी लिक्विड खाद को भी अनिवार्य रूप से खरीदना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि उन्हें आवश्यकता तो केवल पारंपरिक खाद की है, लेकिन उसके साथ नैनो उत्पाद लेना मजबूरी बना दिया गया है, जिससे उनकी खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।

किसानों के अनुसार कुछ समितियों पर दो कट्टों पर एक बोतल और कहीं तीन कट्टों पर एक बोतल नैनो खाद लेने की शर्त रखी जा रही है। ऐसे में यदि किसी किसान को अधिक खाद की जरूरत होती है, तो उसे अतिरिक्त रूप से नैनो उत्पाद भी खरीदने पड़ते हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

डीएपी खाद का एक कट्टा लगभग 1350 रुपए में मिल रहा है, जबकि नैनो डीएपी की एक बोतल पर करीब 600 रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि पहले ही डीजल, बीज, कीटनाशक और मजदूरी की बढ़ती लागत से खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है, ऐसे में यह अतिरिक्त खर्च और परेशानी बढ़ा रहा है।

हालांकि कृषि राज्य मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि किसानों को नैनो खाद की जबरन बिक्री नहीं की जा सकती, इसके बावजूद जिले में ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि नैनो उर्वरकों के उपयोग, मात्रा और प्रभाव को लेकर उन्हें पर्याप्त जानकारी और प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।

किसानों का कहना है कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग में अलग से स्प्रे मशीन, श्रम और समय की आवश्यकता होती है, जिससे अतिरिक्त लागत बढ़ती है। बारिश और तेज हवा में इसका छिड़काव भी कठिन हो जाता है। कई किसान अभी भी इसके परिणामों को लेकर आशंकित हैं और उन्होंने समितियों में आपत्ति भी दर्ज कराई है।

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Chanchal Rathore

Desk Reporter

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