सरिस्का टाइगर रिजर्व विस्थापन मामला: गांवों की शिफ्टिंग प्रक्रिया फिर हुई धीमी

सरिस्का टाइगर रिजर्व से जुड़े गांवों के विस्थापन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद प्रक्रिया एक बार फिर धीमी पड़ गई है, जिसके कारण देवरी और हरिपुरा गांवों के ग्रामीणों को अभी तक जमीन नहीं मिल पा रही है। इन दोनों गांवों के करीब 200 परिवार जंगल से बाहर जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन भूमि आवंटन और प्रशासनिक प्रक्रिया में अड़चनों के चलते उनका पुनर्वास अटका हुआ है।

देवरी गांव के लिए लक्ष्मणगढ़ में लगभग छह महीने पहले जमीन चिह्नित की गई थी, लेकिन जांच के दौरान यह भूमि वन विभाग की निकली, जिसके कारण बिना डायवर्जन इसे ग्रामीणों को आवंटित नहीं किया जा सकता। इसका प्रस्ताव सरकार को भेजा गया, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। इसी तरह हरिपुरा गांव के लगभग 125 परिवार भी विस्थापन के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें थानागाजी में जमीन नहीं मिल पा रही है, जबकि तिजारा में उपलब्ध भूमि को वे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

सरिस्का टाइगर रिजर्व में कुल 29 गांव स्थित हैं, जिनमें से कुछ गांवों जैसे भगानी, रोट क्याला, उमरी, बाबली और पानी ढाल के ग्रामीणों को पहले ही विस्थापित किया जा चुका है, जिससे लगभग 200 हेक्टेयर क्षेत्र खाली हुआ है। वहीं क्रास्का, हरिपुरा, सुकोला, देवरी, कांकवाड़ी और नाथूसर सहित 11 गांवों में विस्थापन की प्रक्रिया जारी है, जहां कई परिवारों को पहले ही स्थानांतरित किया जा चुका है और बाकी जमीन का इंतजार कर रहे हैं।

विस्थापन की देरी के कारण सरिस्का में बाघों की आबादी और उनके टेरिटरी क्षेत्र में भी असंतुलन देखा जा रहा है। बाघों को पर्याप्त जंगल क्षेत्र नहीं मिल पाने के कारण वे आबादी वाले इलाकों में आ रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गांवों का समय पर पुनर्वास हो जाए तो न केवल ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर बस सकेंगे, बल्कि बाघों को भी उनका प्राकृतिक आवास पूरी तरह मिल सकेगा।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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